Monday, September 8, 2014

जैसा कि हम जान सके , हमारी वंशावली

श्री गजाधर सिंह [ पितामह ]



जैसा कि  हम जान  सके , हमारी वंशावली 

[ ये विवरण दिनाक 8  सितम्बर 2014  तक का हैं , कुछ नाम छूट  गए है ,जिन्हे बाद में पूछ के भरने की कोशिश की जाएगी , कुछ फोटो  भी मेरे पास नहीं है ,उन्हें भी मांग के पूरा  करंगे ,  कुछ सही में मुझे याद नहीं रह पाया होगा तो मेरी इल्तज़ा है कि भाई साहब ,भरत ,मुन्नी या पप्पू इसे पूरा करेंगे , बबलू की  रूचि बहुत है लिखने में ,मेरा उससे आग्रह  है की वो भी जरूर लिखे , मेने योजना बनाई है की जब भी में ग्वालियर ,भोपाल ,जाना होगा तब में उनसे और जानकारी लेके पूरा करूँगा ,बहुत से महत्वपूर्ण फोटो भी मेरे पास नहीं ही ,उन्हें भी एकत्रित करना हैं , आप सब से आग्रह है की आप चाहे तो सीधे भी इस ब्लॉग में लिख सकते हैं , ब्लॉग का नाम टायप  करना पड़ेगा " hamtoaisehihain.blogspot.in  उसका पास वर्ड है  civilrights 


मेने इस विवरण के तीन भाग किये हैं  1 , वंशावली 2  , आर्थिक सामाजिक स्थिति  ३, मेरी अपनी जीवन गाथा।  
आज पहला भाग -   लाखन  सिंह  8  सितम्बर 20014  बिलासपुर ] 

दादी बड़ी बाई 
हमें बताया गया है की हमारे पूर्वज राजस्थान के सीकर जिले से मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के सबलगढ़ तहसील में नंदपुरा बुरहाना  गॉव  में आके बस गए थे , कई सालो के बाद शायद डकैत की समस्या को लेकर या कोई और कारण  से उनका पूरा परिवार लश्कर के मोहल्ला कम्पू बजरिया में आके रहने लगे. दादा ने यह भी बताया था की हमारे बाबा [ श्री गजाधर सिंह ] अपने परिवार सहित बेहद गरीबी की स्थिति में गए थे , शायद उनके साथ मेरी दादी और बाबा अपने भाई नारायण सिंह और उनके परिवार के साथ आये थे

1 , मेरे बाबा के पिता का नाम श्री हरिश्चंद्र सिंह था , शायद वे कभी लश्कर नहीं आये ,क्योकि कभी इसकी चर्चा नहीं हुई, इस तरह कह सकते हैं की लश्कर में हमारे परिवार की शुरुवाद मेरे बाबा से ही हुई थी , बाबा के साथ उनके छोटे भाई श्री नारायण सिंह भी आये थे ,

2 , मेरे बाबा श्री गजाधर सिंह के दो बेटे और एक बेटी हुई , बड़े बेटे श्री जगन्नाथ सिंह ,छोटे बेटे श्री बैजनाथ सिंह और एक बेटी ,जिनका नाम कमसे कम मुझे तो आज तक नहीं मालूम

पिताजी श्री जगन्नाथ सिंह 



दादा  के छोटे  भाई श्री बैजनाथ सिंह





3  गजाधर सिंह के छोटे भाई नरायन सिंह के एक बेटा  हुआ श्री गोपाल सिंह ,उनके एक बेटा  महावीर सिंह और उनके एक बेटा  विजय सिंह [ बंटी ] हुए। 

4 , मेरे पिता श्री जगन्नाथ सिंह के चार बेटे और दो बेटी हुई , इनमे से एक बेटी नीलम का निधन 6 साल की उम्र  में  हो गया ,उनके बड़े बेटे श्री राम सिंह , उनसे छोटे लाखन  सिंह ,उनसे छोटे भारत सिंह ,उनसे छोटी बहन उमा और सबसे छोटा श्री शत्रुघन सिंह हुए , घर के नाम क्रमश  मुन्ना ,अन्ना ,भारत ,मुन्नी और पप्पू हैं। 

रामसिंह , भारत सिंह ,शत्रुघ्न सिँह , लखनसिंह  उर बहन उ

5 बाबा के छोटे बेटे बैजनाथ सिंह के एक बेटा  संजीव सिंह ,एक बेटी गुड़िया हुई बैजनाथ सिंह की शादी भिंड जिले के नोनेरा ग्राम में अकबर सिंह चौहान की बेटी अंगूरी देवी से हुई , उनके बेटे संजिक की शादी ग्वालियर में सरिता से हुई ,उनके तीन बेटी है ,और गुड़िया की शादी ग्वालियर  ही हुई  इनके एक बेटी और एक बेटा  हैं ,
अभी भी संजीव सिंह लश्कर के पुश्तैनी माकन में ही रहते है ,जिस घर में हम चारो  भाइयो और बहन का जन्म ,हुआ , और सबका बचपन और योवन बिता ,हम दो भाई और एक बहन की शादी भी इसी घर में हुई , पुश्तैनी माकन से तात्पर्य है की इस माकन के ठीक बगल में हमारा घर हुआ करता था , जिसे बाद में बेच दिया गया , लेकिन काकाजी उसी हिस्से में रहे जो उस समय उनके हिस्से में आया था

6, मेरे बाबा की शादी मोरेना जिले के पोरसा के पास जगतपुर में तोमर परिवार में हुई ,दादी का नाम बड़ी बाई था , दादी के पिता का नाम तो नहीं मालूम , लेकिन उनके भाई गुलाब सिंह ,हाकिम सिंह और दो और है , हम लोग कई बार  शादी वगैरा में जगतपुर गए है , उनके यहाँ खूब खेती और आम के बगीचे  थे।  उनके छोटे भाई हाकिम सिंह की शादी नहीं हुई थी ,वे सुनने और बोलने में असमर्थ थे ,पहलवानी  भी करते थे ,

7, सबसे पहले अपनी बुआ के बारे में , ये सही है की उनका नाम तक हमें नहीं मलुम ,क्योकि मुझे याद नहीं की कभी उनका कोई जिक्र कभी हुआ हो , हो सकता है जब दादी जिन्दा रही होंगी तब जरूर उनकी बात होती होगी , लेकिन जैसे दादा के भाई और बंधुओ को बात होती है ,वैसे बुआ की चर्चा नहीं सुनी , में आज सोचता हूँ की कैसे एक महिला अपने ही परिवार में विस्मृत हो जाती है ,इसका उद्धरण मेरी बुआ से बड़ा कोई नहीं होगा ,सही भी यही है की मेरे दिमाग में बुआ को लेके ही ये सब लिखने का ख्याल आया , होता भी यहिओ है की जो बहु आती है हमारे परिवार में वो तो कुछ सालो  अपनी स्थिति बना भी लेती है ,लेकिन जो बेटियां  दूसरे परिवार में जाती है ,हम लोग उन्हें एक समय बाद भूल से जाते हैं

तो हमारी बुआ अपने दो bhaiyo  में अकेली बहन थी ,बहुत सुन्दर थी , शादी कब हुई ये तो नहीं मालूम। लेकिन में उनकी ससुराल जरूर गया था , उनकी शादी दादा ने ननिहाल जगतपुर के ठीक पास खुशलपुरा गॉव में श्री बेताल सिंह भदौरिया से हुई थी ,उनके एक बेटा  भी था ,उनका नाम पुत्तू  सिंह हैं , बुआ का निधन शादी के बाद जल्दी हो गया था ,निधन के बाद उनके पति ने और दो शादिया की , पत्नियों के निधन के बाद ही ,मुझे अच्छी  तरह याद है की किसी की शादी में दादा के साथ भात चढाने के लिए में भी खुशाल पूरा गया ,और भी कई बार जाना हुआ ,दादा उनकी बहुत याद करते थे

फूफा जी श्री बैताल  सिंह  कई बार हमारे घर लश्कर भी आये थे ,उनकी रोबदार सफ़ेद मूछें  अभी तक याद हैं , वे काफी अमीर थे , दादा ने ek  बार बताया भी था की आथिक स्थिति ख़राब होने के समय एक बार दादा खुशाल पूरा भी गए थेरोजगार की तलाश में

उन्होंने एक सिलाई मशीन'पफ '[ puff] खरीदी थी ,उसे लेके वे गॉव गए। लेकिन वह शायद काम जम  नही पाया। और वापसी में आते समय उनकी मशीन ऊट  से गिर के काफी टूट गई थी ,जिसका गिला दादा को हमेशा बना रहा ,दादा ये भी कहते थे, की  बैटल सिंह ने उन्हें साथ नहीं दिया ,जिसके कारण  उन्हें खली हाथ वापस आना पड़ा। दादा के लिए पफ मशीन बहुत महत्वा  रखती थी , वो  आखरी तक हमारे घर में रखी रही ,२०१० के आसपास उन्होंने भारी  मन से उसे बेच दिया। ,

8. हमारे दादा यानि पिता की शादी उत्तरप्रदेश के उरई जिले के  रामपुरा  से १५-२० किलोमीटर दूर उमरी गॉव में श्री महादीन सिंह की बेटी हुब्बा देवी से हुई , सन  मुझे नहीं मालूम लर;इन वो साल शायद १९४६-47  रहा होगा।  माँ  के एक ही भाई हीरा  सिंह थे और उनकी दो बहने भी थी ,हीरा  सिंह के एक बेटा  राजा सिंह अभी भी अपने गॉव  स्योड़ा  में रहते हैं , हमारे नाना भदौरिया थे ,जो मूल रूप से भिंड जिले के स्योंडा  गॉव  के थे ,लेकिन उमरी में अपने मामा के घर  गोद  चले गए थे , उमरी सेंगरो का  गॉव  हैं। उमरी में हमारी माँ के दो भाई धीरज सिंह ,जगत सिंह का नाम मुझे याद है ,धीरज सिंह के बेटे कप्तान सिंह की भी मुझे  याद हैं ,  में बचपन में कई बार उमरी गया था ,भाई साहब के साथ , उमरी की मेरी बहुत याद है जो में लग से लिखूंगा ,

9 ,  मेरे सबसे बड़े भाई और दादा के सबसे बड़े बेटे श्री राम सिंह की शादी मोरेना जिले के सिहोनिया गॉव में श्री रामनाथ सिंह की बेटी उर्मिला से हुई , [ सिर्फ इतना सा की में उनकी शादी के पहले भाभी को देखने गॉव गया था , वो अलग बात है की उस समय इसका कोई रिवाज़ नहीं था ] भाभी के पिता के बड़े भाई श्री मलखान सिंह का बड़ा नाम था ,भाभी के भाई महवीर सिंह , राजू ,गजेन्द्र सिंह ,बहन  गुड़िया  हैं , सिहोनिया मोरेना का बड़ा नमी गॉव है ,इस गाव्  में पुरात्तवा कालीन ककनमठ और ऐतिहासिक जैन मंदिर हैं , बड़ा वैभवशाली गॉव  है ,यहाँ टेकरी पे एक हनुमान का भी मंदिर हैं ,  मुझे कई बार जाने का मौका मिला ,कई बार शादियों और कई बार भाभी को लाने  ले लिए ,

श्री रामसिंह  सबसे बड़े भाई


 भाभी उर्मिला 


10 , बड़े भाई रामसिंह  के तीन बेटे और एक बेटी हुई , बड़े बेटे  श्री सतेंद्र सिंह , दूसरे श्री विश्व विजय सिंह ,तीसरे श्री दिग्विजय सिंह और बेटी प्रीति हैं। इनके घर के नाम क्रमशा  डब्बू ,बबलू ,सीटू और प्रीति है। सबसे बड़ी बात ये की बबलू और सीटू के नाम मेरी सलाह पे रखे गए , विश्व विजय सिंह ,दिग्विजय सिंह और एक नाम और मेरे दिमाग में  था  शत्रु विजय सिंह , नाम बड़े सामंती सरीके से ही है। लेकिन ठकुरो जैसे भी तो हैं , और हाँ दिग्विजय का घर का नाम सीटू की बड़ी रोचक कहानी हैं , उन दिनों में सीपीएम  [ कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी ] का में पूर्णकालिक कार्यकर्त्ता था यानि सिवाय पार्टी कोई और कुछ दिमाग में था ही नहीं ,पार्टी के मजदुर संघटन को बोलचाल में सीटू कहते थे ,आज भी कहते यही , मजदुर संघटन का पूरा नाम है " सेंटर ऑफ़ ट्रेड यूनियन " शार्ट में सीटू , और मेरे कहने पे भाईसाहब  बेटे का घर का नाम  सीटू रख लिया , इन्ही सालो में जब मेरी बेटी हुई तो उसका नाम भी घर का हमने सीटू ही रखा


सतेंद्र सिंह  डब्बू 



प्रीति  परिहार [ छोटी बहन ]

दिविजय सिंह सीटू 
विश्वविजय सिंह बबलू 
11 , भाई साहब के बड़े बेटे सतेंद्र सिंह की शादी ग्वालियर में रेशम  मिल लाइन से ही चौहान  परिवार में मीनू से हुई , डब्बू [ सतेंद्र ] के दो बड़े होनहार बेटे हुए।  पहले दुष्यंत सिंह [ सोना ] दूसरा हर्षवैधान सिंह [हर्ष ]  

उनके दूसरे बेटे बबलू [ विश्वविजय सिंह ] की पहली शादी मुंबई की मीनू से हुई ,दुर्भाग्य से ये शादी ज्यादा नहीं चल पाई , तलाक के बाद उन्होंने भोपाल से शिखा मालवी के साथ हुई , बबलू के दो प्रतापी बेटे हुए  पहला, रूद्र  प्रताप सिंह [ भीम ] दूसरा विदुर प्रताप सिंह [ कृष्णा ] हुए। 



बबलू की पत्नी शिखा सिंह 
बबलू के बड़े बेटे भीम यानि रूडी प्रताप सिंह 

बबलू के छोटा बेटा  कृष्ण  यानि रुद्रप्रताप सिंह  

बबलू यानी विश्व विजय सिंह 



























उनके तीसरे बेटे सीटू [ दिग्विजय सिंह ] की शादी भोपाल में ही तपस्या के साथ हुई , दोनों के एक प्यारी  सी बेटी जिनि है 

भाई साहब की बेटी प्रीति की शादी विदिशा में परिहार परिवार में श्री देवेन्द्र सिंह से हुई 


सतेंद्र की पत्नी मीनू 
दिग्विजय सिंह की पत्नी तपस्या 
सतेंद्र सिंह , विश्वविजय सिंह ,दिग्विजय सिंह ,दुष्यंत सिंह ,हर्ष वर्धन सिंह , शिवप्रताप सिंह ,तनिश सिंह 
12 दादा के दूसरे बेटे यानि मेरी [ लाखन सिंह ] शादी मोरेना जिले के कोथर  कला के खजूर के पूरा में श्री अभिलेख सिंह तोमर की बेटी उषा के साथ हुई
ये शादी 13  जुलाई  1973  को हुई ,उषा के एक भाई राम शंकर सिंह ,एक बहन शारदा है , भाई रामशंकर की शादी लश्कर में जोति  भदौरिया  से हुई , ज्योति के एक भाई विकास और   बहन , दीपा ,आरती ,गुड्डा ,प्रीति ,बिनु हैं  और बहन शारदा की शादी आगरा में रामभजन सिंह राठोर  के साथ हुई।   रामशंकर के तीन बेटी और एक बेटा  है , बेटिया  , मोना [ अदिति ],सोना [ आकंझा ]  ,अनु और बेटा  विनायक हैं ,


लाखन सिंह  
लाखन सिंह  की पत्नी   उषा 
12 , लाखन  सिंह के दो बेटी और एक बेटा  हुये , बड़ी बेटी  नताशा [ सीटू ] बेटा  भगत सिंह [विक्की ] और सबसे छोटी बेटी ज़हीन [ जुली ] हुई , इन तीनो के नाम कि भी बड़ी कहानी है , सबसे पहले भगत सिंह : जब हम आंदोलन में थे तो सबका कहना था की सारे  नेता ये तो चाहते है की देश में भगत सिंह पैदा हो ,लेकिन ये भी छटे है की वो हमारे घर में नहीं  बल्कि पड़ोस में हो , तब से ही मेने सोचा था की में अपने बेटे का नाम जरूर भगत सिंह रखूँगा , और वो ही कारण था ,  बेटी का नाम नताशा का भी ऐसा ही इतिहास है ,उन दिनों ऊपर रूस और उसके क्रांति के आलावा कुछ सूझता hi  नही था , क्रांति में साशा और नताशा नाम की दो बहने  थी ,जिन्होंने क्रांति में अपनी जान की baaji  लगाई , और फिर उन दिनों क्रांतकारी यशपाल की  सिंघावलोकल पढ़ रहा था , यशपाल की भी दो नातिन थी साशा और नताशा , मेने भी अपनी पहली सबसे बड़ी बेटी का नाम नताशा रखा ,और घर  में नाम दिए सीटू , सीटू हमारी पार्टी माकपा का मजदुर संघटन है , जिसे शार्ट में सीटू कहते हैं ,आज भी मुझे बड़ा इस नाम पे गर्व हैं।  छोटी बेटी का नाम ज़हीन रखने के पीछे एक उपन्यास में बेहद इंटेलिजेंट ,सुन्दर ,एक्सीलेंट लड़की को ज़हीन कहा गया है ,तो बस मेने उसका नाम ज़हीन रख लिया , जिसे घर पे जूली  कहने लगे

छोटी बेटी ज़हीन सिंह [जूली ]
लखन सिंह की बेटी नताशा सिंह [सीटू ]



लाखन सिंह के बेटे भगत सिंह [ विक्की ]

13 , मेरी बड़ी बेटी नताशा की शादी रायपुर में प्रतापगढ़ [ यूपी] के सोमवंशी परिवार में ठाकुर छेदी  सिंह के बड़े बेटे राजकुमार के बड़े बेटे  अनीश   सोमवंशी के साथ 28  नवमबर 2004  को हुई।   सीटू के दो बेटे  कृतार्थ  [ कीटू ]  और कृतज्ञ [ नानू ] हैं।  


नताशा के पति अनिश सोमवंशी 
सीटू के बेटा  किंटू  ,कृतार्थ  सोमवाबशी 

नताशा सिंह 

सीटू के छोटा बेटे नानू  , कृतज्ञ  सोमवंशी 
 ज़हीन[ जुली] के शादी अभी तक नहीं हुई है , शादी  के बाद आगे का विवरण लिखेंगे , भगत  सिँह [ विक्की ] की शादी 27  नवम्बर  2014  को उसकी बचपन की मित्र शर्मिष्ठा घोष [ पिता श्री प्रकासश चन्द्र  घोष  मा सप्तदीपा  घोष ] के साथ बिलासपुर में संपन्न हुई , शादी पूरे  रीतिरिवाज  और धूम धाम  से हुई, परिवार के सब ही लोग इस शादी में शामिल हुए , अंतर्जातीय विवाह हमारे खंडन में  दूसरा था , इसके  पहले भाई साहब के दूसरे  बेटे  बबलू ने भी अपनी शादी ऐसे ही की थी ,लेकिन अंतर्जातीय शादी पुरे रीतिरिवाज के साथ पहली बार हुई , मेरा यही आग्रह शर्मिष्ठा के घर वालो से था, की  शादी पुरे मन से और धूमधाम से करना चाहिए ,उन्होंने हमारी बात मानी , 






  












14 , मेरे छोटा भाई भरत सिंह की शादी झाँसी में नारायण सिंह  तोमर  की बेटी किरण से हुई , भारत की एक बेटी सृष्टि  सागर है ,किरण के तीन भाई प्रताप सिंह, लक्षमण सिंह और एक ,,,,,, है ,जिनमे से उनके सबसे बड़े भाई प्रताप सिंह की हत्या किसी ने कर दी थी ,



भरत  की पत्नी किरण सिंह 

भरत  की बेटी सृष्टि सागर सिंह 


भरत  सिंह  






















15 , हमारी सबसे प्यारी बहन उमा जिन्हे हम सब मुन्नी कहते हैं , उनकी  शादी  भिंड के टेहन गोर के रहने वाले और ग्वालियर में जेसी मिल में श्री नाथू सिंह कुशवाह के बेटे बीरेन्द्र  सिंह से हुई , बिरेन्द्र बाद में पुलिस में इन्स्पेक्टर के पद पे आये , बिरेन्द्र मूल रूप से खिलाडी ही हैं ,बेहद शालीन , शांत ,भले और ईमानदार व्यक्ति हैं,मुन्नी के दो बेटी सुमिति  और अमिति है ,उनके एक बेटा  मुन्नू [ शिवप्रताप  सिंह ] है ,वो भी अपने पिता की तरह   खेल में बहुत नाम कमाएंगे।  बड़ी  बेटी सुमिति  की शादी कानपूर में श्री अलोक सिंह चौहान से हुई ,उनके दो बेटे,  पहला  पृथ्वी  राज सिंह चौहान [ आर्यन ] दूसरा यश वर्धन सिंह [ येसु ] हैं  छोटी बेटी अमिति की शादी ग्वालियर में श्री उमा प्रसाद सिंह से हुई जो नेवी में कार्यरत हैं। बड़ी बेटी चंडीगढ़ में और बांकी पूरा परिवार ग्वालियर में रहते हैं। 
सुमिति  मुन्नी के बड़ी बेटी 
मुन्नी के छोटी बेटी अमिति 
 
बहन मुन्नी और उनके पति श्री बिरेन्द्र सिंह कुशवाह


मुन्नी के बेटे  मुन्नू , शिवप्रताप सिंह 
समिति  के पति  श्री अलोक सिंह  चौहान 
आर्यन [ पृथ्वी राज सिंह ] येशु [ यशवर्धन सिंह ] सुमिति  के दोनों बेटे 

16 हमारे सबसे छोटे भाई शत्रुघन सिंह हमारे साथ बचपन  दादा और अम्मा के साथ बिलासपुर में आ गए थे , इनके शादी पेण्ड्रा रोड के और अब बिलासपुर के निवासी श्री शालिग राम सिंह गहलोत की बेटी  ममता  से हुई , उनके एक बेटा  तनिश सिंह है , वो भी खेल में बहुत रूचि रखता हैं 

सबसे छोटे भाई शत्रुघन सिंह 
शत्रुघन सिंह के बेटे तनिश सिंह 

शतुघन सिंह ,इनकी पत्नी ममता






\[ ये विवरण दिनाक 23   दिसम्बर  2014  तक का हैं , कुछ नाम छूट  गए है ,जिन्हे बाद में पूछ के भरे जायेंगे , कुछ फोटो  भी मेरे पास नहीं है ,उन्हें भी मांग के पूरा किया जायेगा।  ]

लाखन सिंह 

बिलासपुर  08 ,09 ,2014 

No comments:

Post a Comment