वसीयत शरीर के बारे में
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दिनांक 6 .10.2015
ये मेरी वसीयत नहीं है क्यों की मेरे पास ऐसा कुछ है ही नही जो में अपने बच्चो में बाँट सकूँ .( आर्थिक या संपत्ति )
मेरे बाद मेरा शरीर जरुर है जिसका निबटारा करने के लिए मेरे मन में बहुत सालों से इच्छा है . जो निम्न है .
1. मेरे शरीर और सारे अंग को सरकारी अस्पताल में दे दिया जाये , इसकी लिखा पढ़ी में समय रहते कर रहा हूँ , दान शब्द का में जानबूझ के उपयोग नही कर हूँ . शरीर अस्पताल में भेजने में जल्दी करना होती है इसका ख्याल रखें . चाहें तो पहले शरीर को जरूरी अंग निकालने के लिए भेज दे, उसके बाद शरोर वापस घर मंगा ले और बांकी लोगो के इंतजार के बाद अंतिम रूप से अस्पताल को भेज दें .
2. जैसा की सब जान ही गये होंगे की मेरा धर्म और उसकी किसी भी क्रिया में लेश मात्र भी विश्वास नहीं है तो स्वाभविक ही है की मेरे बाद मेरे नाम से किसी भी प्रकार का संस्कार न किया जाये , अर्थात कोई अनुष्ठान न करें , तेरवी से लेके श्राद्ध तक या कुछ और
3. अगर संभव हो और आर्थिक स्थिति अनुमति दे तो साल में एक बार आपस में तिथि और माह तय करके पुरे परिवार के लोग किसी के भी घर में ( यानि विक्की सीटू या जुली ) एकत्रित हो के आपसी मेलजोल बैठक आयोजित कर सकें तो ठीक है न हो तो कोइ बाध्यकारी भी नहीं है .
4 मुझे अलग से कुछ लिखना होगा तो जरुर लिखूंगा ये तो मेरे बाद मेरे शरीर और अनुष्ठान को लेके था .
लाखनसिंह बिलासपुर
6.10.2015
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