Thursday, October 6, 2016

मेरा और वीर का पूरे एक महीने बाद फोटो

मेरा और वीर का पूरे एक महीने बाद फोटो
तारीख है 6.10.2016
वो भी खुश अपुन भी बहुत खुश


Wednesday, October 5, 2016

मेरा नाती यानी शौना और विक्की का बेटा

विक्की और शौना के बेटा आज दिनांक 6.09.2016
को बिलासपुर में हुआ .
समय 10.15 am
*****


My tiny lil son...

 I fell in love with you even before I saw you ... I just couldn't wait for the moment we could be together. I could not have asked for a better gift than you my baby. There is no way I can capture my love for you in words. I love you so very much from the deepest part of my heart and I thank you for entering this world as my son as you are so right for me. Because of you, I am a mom. Because of you, I feel complete. I will be here for you always.. Forever... Love you to the moon and back ...
*****
Shrmishtha singh (ghosh )
Shona date 3.10.16

मेरा नाती यानी शौना और विक्की का बेटा

विक्की और शौना के बेटा आज दिनांक 6.09.2016
को बिलासपुर में हुआ .
समय 10.15 am
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My tiny lil son...

 I fell in love with you even before I saw you ... I just couldn't wait for the moment we could be together. I could not have asked for a better gift than you my baby. There is no way I can capture my love for you in words. I love you so very much from the deepest part of my heart and I thank you for entering this world as my son as you are so right for me. Because of you, I am a mom. Because of you, I feel complete. I will be here for you always.. Forever... Love you to the moon and back ...
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Shrmishtha singh (ghosh )
Shona date 3.10.16

वसीयत शरीर के बारे में **** दिनांक 6 .10.2015


वसीयत शरीर के बारे में
****
दिनांक  6 .10.2015


ये मेरी वसीयत नहीं है क्यों की मेरे पास ऐसा कुछ है ही नही जो में अपने बच्चो में बाँट सकूँ .( आर्थिक या संपत्ति )
मेरे बाद मेरा शरीर जरुर है जिसका निबटारा करने के लिए मेरे मन में बहुत सालों से इच्छा है . जो निम्न है .
 1. मेरे शरीर और सारे अंग को  सरकारी  अस्पताल में दे दिया जाये  , इसकी लिखा पढ़ी में  समय रहते कर रहा हूँ ,  दान शब्द का में जानबूझ के उपयोग नही कर हूँ . शरीर अस्पताल में भेजने में जल्दी करना होती है   इसका ख्याल रखें . चाहें तो पहले शरीर को  जरूरी अंग निकालने के लिए भेज दे,  उसके बाद शरोर वापस घर मंगा ले और बांकी  लोगो के इंतजार के बाद अंतिम रूप से अस्पताल को भेज दें .
2. जैसा की सब जान ही गये होंगे की मेरा धर्म और उसकी किसी भी क्रिया में लेश मात्र भी   विश्वास नहीं   है तो स्वाभविक ही है की मेरे बाद  मेरे नाम से किसी भी प्रकार का संस्कार न किया जाये , अर्थात  कोई अनुष्ठान न करें , तेरवी से लेके श्राद्ध तक या कुछ और
3. अगर संभव हो और आर्थिक स्थिति  अनुमति दे तो साल में एक बार आपस में तिथि और माह तय  करके पुरे परिवार के लोग  किसी के  भी घर में  ( यानि विक्की सीटू या जुली )  एकत्रित हो के  आपसी मेलजोल बैठक आयोजित कर सकें तो ठीक है न हो तो कोइ बाध्यकारी भी नहीं है .
‌4 मुझे अलग से कुछ लिखना होगा तो जरुर लिखूंगा ये तो मेरे बाद मेरे शरीर और अनुष्ठान को लेके था .
लाखनसिंह बिलासपुर
6.10.2015